उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में रविवार रात एक कच्चा मकान ढह गया। जिसके मलबे के नीचे दबकर एक महिला की मौत हो गई। जबकि तीन बच्चे घायल हो गए। मामला मांट ब्लॉक के जगरूपा गांव का है। हादसे के बाद पुलिस को सूचना देने के बावजूद शव पूरी रात गांव में ही पड़ा रहा। सुबह पहुंचे एसडीएम ने पीड़ित परिवार को आपदा कोष से चार लाख रुपए दिलाने का आश्वासन दिया है। लेकिन इस हादसे से सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार और लापरवाही की पोल भी खुली है। महिला को सरकारी आवास दिलाने के लिए प्रधान प्रतिनिधि ने पांच हजार रुपए की रिश्वत ली थी। जिसका ऑडियो भी सामने आया है।। एसडीएम ने आरोपों की जांच का भी भरोसा दिया है।
भूमिहीन है परिवार, बारिश में ढहा मकान
ग्राम पंचायत सिकंदरपुर के मजरा नगला जगरूपा निवासी ललितेश भूमिहीन है। परिवार के भरण पोषण का एकमात्र सहारा मजदूरी है। परिवार में पत्नी मीना (33 साल), एक बेटी और दो बेटा हैं। रविवार रात ललितेश का कच्चा जर्जर मकान बारिश की वजह से भरभराकर गिर गया। मलबे के नीचे पत्नी मीना व उसके तीनों बच्चे दब गए। हादसे की जानकारी होने पर आसपड़ोस के लोग मौके पर पहुंचे और मलबे को हटाकर चारों को बाहर निकाला। लेकिन मीना की मौत हो चुकी थी। तीनों बच्चों को घायलावस्था में बाहर निकाला गया।
मृतक की सास ने रिश्वतखोरी का आरोप, प्रधान प्रतिनिधि ने स्वीकारा
रात अधिक होने के चलते बच्चों का घर पर ही इलाज किया गया। उधर हादसे के बाद ग्रामीण मीना के शव को लेकर थाने पहुंचे और घटना की जानकारी दी। लेकिन थाने पहुंचने पर पुलिस ने उन्हें गांव में ही शव ले जाने की बात कही। जिस पर ग्रामीण महिला मीना के शव को उसके घर पर ही ले आए। सारी रात मीना का शव घर पर ही रहा। सुबह होते होते गांव में लोगो की भीड़ इकठ्ठा हो गयी। जिसपर प्रधान प्रतिनिधि भी हादसा स्थल पर पहुंच गया। मृतका की सास ने बताया कि मकान पुराना था और 5 हजार रुपए प्रधान प्रतिनिधि ने लिए थे। जिसके बाद भी लगातार उसको आश्वासन ही मिल रहा थे और अब यह हादसा हो गया। वहीं, प्रधान प्रतिनिधि शशि कुमार का कहना है कि उसने एडाओ प्रेमपाल को आवास पास कराने के लिए 5 हजार रुपए दिए थे।
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